Tuesday, 11 May 2010

पहाड़ी चित्रकला


पहाड़ी चित्रकला का प्रमुख विषय प्रेम है जो लाया शोभा तथा सौंदर्य के साथ दर्शाया गया है| उस समय युद्धों के कारण जीवन अस्त-व्यस्त तथा अस्थिर था और स्त्रियाँ अपने पतियों की राह देखती रहती थी|  और ज्यों ही युद्ध ख़त्म होने के बाद पुरुष घर आते थे, तो लम्बे अरसे के बाद का मिलन बहुत ही मधुर होता था| जैसे सारा संसार मानों प्रेम रस में डूब जाता हो| कभी कभी तो युद्ध के बीच में मिलने वाले छोटे से विराम में ये स्त्रियाँ अपने प्रेमी या पति से जंगल में भी मिलने चली जाती थीं| कांगड़ा की चित्रकला में प्रेम के वियोह और संयोग का बहुत ही सुन्दर चित्रण हुआ है|


----- अंजना सकलानी

2 comments:

  1. महाघोर कलयुग

    'कुटुए' दे आटे लोको
    कित्ता बड़ा क्मॉल
    कईयां दे व्रत टुट्टे
    कई पोंचे हस्पताल
    इन्हां मिलावट खोरां दा
    बस इक ही इलाज
    छित्तर पोल्ले मारी मारी
    करा इन्हां यो लाल
    दुंह पैसेयाँ दी खातर
    एडा वड्डा जुर्म कित्ता
    लोकां दी भावना नें खेले
    सबनिजो धोखा दित्ता
    गोली मारी देया
    दए पपियां जो
    फांसिये पर लटकाई देया
    सरे महापपियाँ जो
    दीपक "कुल्लुवी" अर्ज़ एह करदा
    अपणे देशे यो बचाई लेया
    मिलावटखोर कन्नें भ्रष्टाचारियां जो
    सूलिए पर चढ़ाई देया

    दीपक शर्मा कुल्लुवी
    09136211486
    ०७-०४-२०११

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